तमिलनाडु के खूबसूरत पहाड़ी इलाके गुडलूर में स्थित संत थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल उस वक्त खास चर्चा का केंद्र बन गया, जब देश की लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। यह मौका सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए यादों, प्रेरणा और आत्मीय संवाद का एक भावुक क्षण बन गया।
कार्यक्रम के दौरान जब राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत शुरू की, तो उन्होंने राजनीति या भाषणबाज़ी से हटकर अपने छात्र जीवन की सादगी भरी यादें साझा कीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे केमिस्ट्री की टीचर बहुत पसंद थीं, क्योंकि वह बहुत अच्छा पढ़ाती थीं। परीक्षा की तैयारियों में मेरी बहुत मदद करती थीं।”
उनकी इस बात ने वहां मौजूद छात्रों और शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी और माहौल को बेहद सहज व अपनापन से भर दिया।
राहुल गांधी ने अपनी बातों में यह भी समझाया कि एक अच्छे शिक्षक का छात्र के जीवन में कितना बड़ा योगदान होता है। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, धैर्य और भरोसे से भरा शिक्षण न सिर्फ परीक्षा में सफलता दिलाता है, बल्कि आत्मविश्वास और सोचने की क्षमता भी विकसित करता है। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए बच्चों को यह संदेश दिया कि सीखने की प्रक्रिया में डर नहीं, जिज्ञासा और विश्वास होना चाहिए।
स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होना राहुल गांधी के लिए भी भावनात्मक क्षण था। उन्होंने स्कूल की 50 साल की यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान समाज की नींव मजबूत करते हैं। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को नमन किया और कहा कि किसी भी देश का भविष्य कक्षा में बैठा छात्र और उसे दिशा देने वाला शिक्षक ही तय करता है।
बच्चों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने उन्हें खुलकर सवाल पूछने, अपनी राय रखने और सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि असफलताओं से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वही हमें मजबूत बनाती हैं। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा कर छात्रों को यह भरोसा दिलाया कि हर छात्र में कुछ खास करने की क्षमता होती है।
इस मौके पर स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, छात्र और अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने राहुल गांधी की सादगी, सहजता और बच्चों से सीधे संवाद करने की शैली की सराहना की। स्वर्ण जयंती समारोह एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्मृतियों और प्रेरणा का उत्सव बनकर उभरा।
कुल मिलाकर, संत थॉमस इंग्लिश हाई स्कूल का यह स्वर्ण जयंती समारोह सिर्फ एक उपलब्धि का जश्न नहीं था, बल्कि वह मंच था जहां एक राष्ट्रीय नेता ने अपनी शिक्षक के प्रति कृतज्ञता जाहिर कर यह संदेश दिया कि सफलता की सबसे मजबूत नींव कक्षा और शिक्षक ही होते हैं।