पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह मामला कांड संख्या 05/2026 के तहत दर्ज हुआ है, जिसकी जांच अब खुद थाना प्रभारी करेंगे। प्राथमिकी में संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उनका सिर फट गया और छह टांके लगाने पड़े।
कबूलनामे के लिए दबाव और कथित हिंसा
संतोष कुमार के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को उन्हें फोन कर पूछताछ के लिए हिनू स्थित ईडी कार्यालय बुलाया गया था। ईडी के निर्देश पर वे तय समय पर कार्यालय पहुंचे। पूछताछ के दौरान उनसे किसी अपराध को कबूल करने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोप स्वीकार करने से इनकार किया, तो ईडी अधिकारियों का रवैया कथित तौर पर हिंसक हो गया।
डंडों से पिटाई, सिर फोड़ने का आरोप
प्राथमिकी में संतोष कुमार ने कहा है कि अपराध नहीं कबूल करने पर ईडी के अधिकारियों ने उन्हें डंडों से पीटा, जिससे उनका सिर फट गया और काफी खून बहने लगा। मारपीट के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि उन्होंने बयान नहीं बदला तो उनके परिवार के सदस्यों को जेल भेज दिया जाएगा।
इलाज के बाद फिर ईडी कार्यालय लाने का दावा
घायल अवस्था में संतोष कुमार को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके सिर में छह टांके लगाए गए। आरोप है कि अस्पताल में भी उन्हें धमकाया गया कि वे डॉक्टर को चोट लगने की असली वजह न बताएं। इलाज के बाद, उनके बार-बार अनुरोध के बावजूद, उन्हें फिर से ईडी कार्यालय ले जाया गया।
सबूत मिटाने और चुप रहने का दबाव
संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि ईडी कार्यालय लौटने पर उनसे खून से सनी टी-शर्ट जबरन उतरवा ली गई और नई टी-शर्ट पहनाई गई। इसके अलावा, एक कथित ‘इंसिडेंट रिपोर्ट’ पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए, जिसे उन्हें पढ़ने तक नहीं दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि इस घटना का जिक्र कहीं न करें और रात करीब 10 बजे के बाद उन्हें छोड़ा गया।
धमकी का गंभीर आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने संतोष कुमार को धमकाया कि यदि उन्होंने इस मामले की जानकारी मीडिया, पुलिस या किसी वकील को दी, तो उनकी पत्नी और बच्चों को जेल भेज दिया जाएगा। संतोष कुमार का कहना है कि इस डर और दबाव के कारण वे लंबे समय तक चुप रहे, लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अब क्या है आगे?
एयरपोर्ट थाना में दर्ज इस प्राथमिकी ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। जांच की जिम्मेदारी खुद थाना प्रभारी को सौंपी गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या संतोष कुमार को न्याय मिल पाएगा।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ कथित ज्यादती का है, बल्कि पूछताछ के दौरान अधिकारों और कानून के पालन पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।
किया तो डंडों से पीटा, सिर फोड़ा, जान से मारने की दी धमकी’
पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह मामला कांड संख्या 05/2026 के तहत दर्ज हुआ है, जिसकी जांच अब खुद थाना प्रभारी करेंगे। प्राथमिकी में संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उनका सिर फट गया और छह टांके लगाने पड़े।
कबूलनामे के लिए दबाव और कथित हिंसा
संतोष कुमार के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को उन्हें फोन कर पूछताछ के लिए हिनू स्थित ईडी कार्यालय बुलाया गया था। ईडी के निर्देश पर वे तय समय पर कार्यालय पहुंचे। पूछताछ के दौरान उनसे किसी अपराध को कबूल करने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोप स्वीकार करने से इनकार किया, तो ईडी अधिकारियों का रवैया कथित तौर पर हिंसक हो गया।
डंडों से पिटाई, सिर फोड़ने का आरोप
प्राथमिकी में संतोष कुमार ने कहा है कि अपराध नहीं कबूल करने पर ईडी के अधिकारियों ने उन्हें डंडों से पीटा, जिससे उनका सिर फट गया और काफी खून बहने लगा। मारपीट के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि उन्होंने बयान नहीं बदला तो उनके परिवार के सदस्यों को जेल भेज दिया जाएगा।
इलाज के बाद फिर ईडी कार्यालय लाने का दावा
घायल अवस्था में संतोष कुमार को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके सिर में छह टांके लगाए गए। आरोप है कि अस्पताल में भी उन्हें धमकाया गया कि वे डॉक्टर को चोट लगने की असली वजह न बताएं। इलाज के बाद, उनके बार-बार अनुरोध के बावजूद, उन्हें फिर से ईडी कार्यालय ले जाया गया।
सबूत मिटाने और चुप रहने का दबाव
संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि ईडी कार्यालय लौटने पर उनसे खून से सनी टी-शर्ट जबरन उतरवा ली गई और नई टी-शर्ट पहनाई गई। इसके अलावा, एक कथित ‘इंसिडेंट रिपोर्ट’ पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए, जिसे उन्हें पढ़ने तक नहीं दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि इस घटना का जिक्र कहीं न करें और रात करीब 10 बजे के बाद उन्हें छोड़ा गया।
धमकी का गंभीर आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने संतोष कुमार को धमकाया कि यदि उन्होंने इस मामले की जानकारी मीडिया, पुलिस या किसी वकील को दी, तो उनकी पत्नी और बच्चों को जेल भेज दिया जाएगा। संतोष कुमार का कहना है कि इस डर और दबाव के कारण वे लंबे समय तक चुप रहे, लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब क्या है आगे?
एयरपोर्ट थाना में दर्ज इस प्राथमिकी ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। जांच की जिम्मेदारी खुद थाना प्रभारी को सौंपी गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या संतोष कुमार को न्याय मिल पाएगा।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ कथित ज्यादती का है, बल्कि पूछताछ के दौरान अधिकारों और कानून के पालन पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।