बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत की जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों की समय-सीमा और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर पटना हाई कोर्ट ने एक बेहद अहम और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने जहानाबाद जिले में शराबबंदी कानून के एक मामले में लगभग दो साल बाद किसी मकान को सील किए जाने की कार्रवाई को स्पष्ट रूप से गैरकानूनी करार दिया है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शराबबंदी कानून के तहत की जाने वाली कार्रवाई तय कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही होनी चाहिए। बिना उचित कारण और अत्यधिक देरी के बाद संपत्ति को सील करना न सिर्फ कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को यह अधिकार नहीं है कि वह लंबे समय तक मामला लंबित रखने के बाद अचानक कठोर कार्रवाई करे। ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव का उचित अवसर नहीं मिल पाता, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
पटना हाई कोर्ट के इस फैसले को शराबबंदी कानून के तहत की जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों पर एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश के रूप में देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ भविष्य में होने वाली कार्रवाइयों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि प्रशासन को भी यह संदेश मिलेगा कि कानून के नाम पर मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य में शराबबंदी से जुड़े मामलों में प्रशासन तय प्रक्रिया और समय-सीमा का सख्ती से पालन करेगा, ताकि कानून का उद्देश्य पूरा हो सके और आम लोगों के अधिकारों की भी रक्षा हो सके।