नई दिल्ली/वॉशिंगटन :
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत पर फिलहाल ब्रेक लग गया है । इस अहम समझौते में आ रही रुकावट को लेकर अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। लटनिक के अनुसार, इस डील के आगे न बढ़ पाने की सबसे बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधी बातचीत का न होना है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने की उम्मीदें जताई जा रही थीं। हॉवर्ड लटनिक का खुला बयान अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए शीर्ष नेतृत्व स्तर पर संवाद बेहद जरूरी होता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “जब तक भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच सीधी और ठोस बातचीत नहीं होती, तब तक इस तरह की बड़ी ट्रेड डील पर आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।”उनके अनुसार, कई अहम मुद्दे ऐसे हैं जिन पर नीतिगत और राजनीतिक स्तर पर सहमति जरूरी है, और यह सहमति केवल शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप से ही संभव है। सूत्रों के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील में टैरिफ और बाजार पहुंच. कृषि और डेयरी उत्पादों टेक्नोलॉजी ट्रांसफर वीजा और सर्विस सेक्टर जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। इन जटिल विषयों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के नेताओं के बीच सीधी बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा था। हालांकि भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं और रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन व्यापारिक मोर्चे पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है । लटनिक के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि कूटनीतिक स्तर पर संवाद की कमी अब आर्थिक रिश्तों को भी प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बातचीत होती है, तो ट्रेड डील को लेकर अटकी प्रक्रिया फिर से रफ्तार पकड़ सकती है। दोनों देशों के कारोबारी वर्ग और निवेशक भी इस बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हॉवर्ड लटनिक के बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की राह में तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर की अड़चन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अब यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देशों के शीर्ष नेता इस गतिरोध को तोड़ने के लिए आगे आते हैं या यह अहम समझौता अभी और इंतजार करेगा। भारत-अमेरिका रिश्तों के भविष्य की दिशा तय करने में यह संवाद निर्णायक साबित हो सकता है।