झारखंड हाईकोर्ट के एक अहम और दूरगामी फैसले ने राज्यभर के ईंट भट्ठा संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि ईंट निर्माण के लिए मिट्टी निकालना अब सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जाएगी, बल्कि इसे पर्यावरण से जुड़ी गतिविधि के रूप में देखा जाएगा। ऐसे में बिना अनुमति मिट्टी का उत्खनन करना कानूनन गलत होगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अब ईंट भट्ठा संचालकों को मिट्टी निकालने से पहले पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance) लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन की अनुमति यानी सीटीओ (Consent to Operate) भी जरूरी होगी। अदालत का मानना है कि बिना निगरानी के बड़े पैमाने पर मिट्टी का दोहन पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मिट्टी खनन से भूमि की उर्वरता घटती है, जलस्तर पर असर पड़ता है और आसपास के इलाकों में पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से इस पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। अदालत के इस फैसले को पर्यावरण की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इस फैसले से ईंट भट्ठा संचालकों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि नई प्रक्रिया से न केवल समय बढ़ेगा बल्कि लागत भी काफी ज्यादा हो जाएगी, जिससे ईंटों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अवैध मिट्टी खनन पर लगाम लगेगी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।
कुल मिलाकर, झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में ईंट उद्योग के लिए एक नया नियम और नई चुनौती लेकर आया है, जिसमें अब पर्यावरणीय नियमों का पालन करना हर हाल में अनिवार्य होगा।