पड़हा राजा सोमा मुंडा की निर्मम हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है। इसी आक्रोश के बीच आज यानी शनिवार को आदिवासी संगठनों ने झारखंड बंद का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन आवाज़ों को कुचलने की कोशिश है, जो जमीन, जंगल और जल की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं।
बंद को सफल बनाने के लिए शुक्रवार शाम से ही राज्य के कई जिलों में मशाल जुलूस निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए और उन्होंने न्याय की मांग को बुलंद किया। बंद को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। रांची, खूंटी समेत कई जिलों में एहतियातन स्कूलों में आज छुट्टी घोषित कर दी गई है। प्रशासन ने हालात पर पैनी नजर रखने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी होने की बात कही है।
### सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस अलर्ट मोड में
झारखंड बंद को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पुलिस ने अब तक इस हत्याकांड में सात आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता, शूटर और जमीन माफिया अब भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उनकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
### कई संगठनों ने दिया बंद को समर्थन
इस झारखंड बंद को राज्य के कई बड़े आदिवासी संगठनों का व्यापक समर्थन मिला है। इनमें आदिवासी समन्वय समिति खूंटी, आदिवासी बचाओ मोर्चा, मानकी मुंडा संघ चाईबासा, आदिवासी जनपरिषद, आदिवासी महासभा, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी बचाओ युवा मोर्चा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, सरना सोंगोम समिति, एदेल सांगा पड़हा समिति, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, संयुक्त बाइस पड़हा, नगड़ी जमीन बचाओ समिति, आदिवासी अधिकार संरक्षण समिति, आदिवासी लोहरा समाज, भारत मुंडा समाज, महली जनजातीय विकास मंच, मांझी परगना सरदार महासभा जामताड़ा, झारखंड प्रदेश आदिवासी सरना-पड़हा समाज, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा, आदिवासी छात्रसंघ, कांके रोड सरना समिति, संपूर्ण आदिवासी समाज तमाड़ सहित कई अन्य संगठन शामिल हैं।
प्रशासन ने आम लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। वहीं, बंद का समर्थन कर रहे संगठनों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह लड़ाई केवल न्याय की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा की भी है।