Thursday, April 25, 2024
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परिवहन व्यवसायियों की समस्याओं पर बैठक

परिवहन विभाग से जुडी समस्याओं के समाधान हेतु झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स की एक बैठक विभागीय सचिव के.के सोन के साथ संपन्न हुई। विभाग द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र पर एमवीआई से प्रतिहस्ताक्षर कराने की बाध्यता के लिए गये निर्णय से हो रही समस्या पर प्रमुखता से चर्चा की गई और इस निर्णय को शिथिल करने का आग्रह किया गया। चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा ने प्रथम लॉकडाउन की भांति अपरिचालित बसों के कर माफी की प्रक्रिया के तहत मई व जून 2021 तक के करों को भी माफ किये जाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम लॉकडाउन में बिना परमिट वाली बसों के रोड टैक्स में छूट नहीं दी गई है। जबकि बिना परमिट वाली बसों को सबसे ज्यादा नुकसान इसलिए होता है क्योंकि बिना परमिट के वे अपनी बस का संचालन नहीं कर पा रहे हैं और लगातार टैक्स भर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूली बसें आज तक बंद हैं। ऐसी स्थिति में स्कूली बसों के कर माफी के लिए एक ठोस निर्णय करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह सुझाया कि स्कूली बसों को तब तक रोड टैक्स से छूट दी जानी चाहिए जब तक कि स्कूल संचालित होना आरंभ नहीं होता।

विभाग के निर्णयों के अनुसार 15 नवंबर 2020 से प्रभावी झारखण्ड मोटरवाहन करारोपण अध्यादेश 2019 की अव्यवहारिक नीतियों के कारण जेसीबी, पे-लोडर, क्रेन मशीन मालिकों की समस्या पर बैठक के दौरान चिंता जताते हुए चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि इस नये करारोपण के कारण झारखण्ड में माइनिंग मशीनों की बिक्री 70 से 80 फीसदी घट गई है और बिहार-उडीसा की बिक्री बढ़ गई है। उन्होंने आग्रह किया कि पडोसी राज्य बिहार, उडीसा की तर्ज पर झारखण्ड में भी त्रैमासिक रोड टैक्स की पुरानी व्यवस्था लागू की जाय ताकि कोविड की चुनौतियों से जूझ रहे व्यापार जगत को आंशिक राहत मिल सके।

चैंबर महासचिव राहुल मारू एवं बस ट्रांस्पोर्ट उप समिति के चेयरमेन अनिश बुधिया ने विभागीय सचिव को अवगत कराया कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार और राज्य परिवहन प्राधिकार की बैठक पिछले दो वर्षों से आयोजित नहीं होने के कारण गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति के साथ ही परमिट मिलने में कठिनाई हो रही है। इसी प्रकार वाहन के फिटनेस के समय स्पीड गवर्नर के वार्षिक मरम्मत या रिन्यूअल की मांग की जाती है जो उचित नहीं है क्योंकि वाहन मालिक वाहन के अन्य उपकरणों की तरह इसे भी ठीक रखते हैं, अतः इसकी मांग नहीं की जाय। प्रतिनिधिमण्डल ने बस व्यवसायियों से जुडी प्रमुख समस्याओं के समाधान हेतु विभागीय सचिव को एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में मुख्यतः माननीय न्यायालय के निर्देशों के आलोक में दो बडी बसों के बीच एक उपयुक्त समय अंतराल बनाये रखने का आग्रह किया गया। यह सुझाया गया कि 2 बडी बसों के बीच 10 मिनट और 2 छोटी बसों के बीच 5 मिनट का अंतर रखा जाना चाहिए ताकि सड़कें रेसिंग ग्राउंड में परिवर्तित न हो सकें। चैंबर द्वारा वाहन के प्रतिहस्ताक्षर के दौरान समय-सारिणी निर्धारण में झारखण्ड के बस मालिकों को वरीयता देने तथा झारखण्ड से उत्तर प्रदेश मार्ग का समझौता बनाने का भी आग्रह किया गया। यह कहा गया कि कई नई सडकें और राजमार्गों का निर्माण किया गया है इसलिए अन्य राज्यों के साथ-साथ नये मार्ग बनाने की आवश्यकता है ताकि लोगों को उचित परिवहन सुविधा मिल सके।

विभागीय सचिव के.के. सोन ने चैंबर द्वारा सुझाये गये सभी बिंदुओं पर उचित कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया। प्रतिनिधिमण्डल में चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा, महासचिव राहुल मारू, बस ट्रांस्पोर्ट उप समिति के चेयरमेन अनिश बुधिया एवं हेवी माइनिंग मशीनरी उप समिति के चेयरमेन अभिषेक नेमानी सम्मिलित थे।

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