Saturday, April 13, 2024
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असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति नियमावली का नया ड्राफ्ट झारखंड एवं झारखंडियों के लिए अहितकारी – गौतम सिंह

रांची। अखिल झारखण्ड छात्र संघ (आजसू) के पदाधिकारियों एवं छात्र नेताओं ने रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंप उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति हेतु लाए गए नए नियमावली पर रोक लगाने की मांग की।

अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह ने कहा कि आजसू का यह मानना है कि इस नई नियमावली से विश्वविद्यालय की स्वायत्ता समाप्त हो जायेगी। किसी भी विश्वविद्यालय में नैक ग्रेडिंग के पीछे बहुत से कारक कार्य करते हैं। नैक ग्रेडिंग में A+/A++/A/B++ ग्रेडिंग पाना राज्य सरकार कार्यशैली पर भी आधारित होता है, जैसे विश्वविद्यालय के आधारभूत संरचना का विकास ना हो पाना, विश्वविद्यालय में संसाधन का अभाव, शिक्षकों की कमी आदि, जिसके लिए सीधे-सीधे राज्य सरकार उत्तरदायी होती है। अतः राज्य सरकार की विफलता का खामियाजा शोधकर्ताओं एवं छात्र–छात्राएं भुगतें, यह उचित नहीं है।

नैक से A+/A++/A/B++ ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालय के द्वारा पीएचडी के प्रमाणपत्र जो यूजीसी रेगुलेशन के आधार पर दिया जाता है, वह भारत के सभी विश्वविद्यालयों में समान रुप से मान्य है। फिर नैक ग्रेडिंग के आधार पर इसका मूल्यांकन करना निराधार है। किसी भी असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय में एमफिल/पीएचडी/पोस्ट डाॅक जैसे रिसर्च डिग्री में अंकों का आवंटन एक-समान रहता है, विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। फिर झारखंड में ऐसा क्यों?

अपने ही राज्य के छात्रों के प्रति संवेदनहीन है सरकार– नीरज वर्मा

प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कराये जाने वाला नैक ग्रेडिंग का मूल्यांकन समय-समय पर बदलते रहता है, कभी वह ग्रेडिंग “C”तो कभी “B” तो कभी B++, A, तथा A+ आदि हो सकता है यानी यह परिवर्तित होते रहता है। वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय को “बी ++”, विनोबा भावे विश्वविद्यालय को “बी”, कोल्हान विश्वविद्यालय एवं सिद्धू कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय को “सी” ग्रेड प्राप्त है, जबकि बिनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय एवं नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय को नैक ग्रेडिंग प्राप्त भी है। रांची विश्वविद्यालय को छोड़कर शेष विश्वविद्यालय से प्राप्त पीएचडी डिग्री धारक को 30 में 5 अंक और रांची विश्वविद्यालय को 15, तो इस आधार पर झारखंड के इन सातों विश्वविद्यालयों से पीएचडी डिग्री धारक का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में कैसे सुनिश्चित हो पायेगा? ऐसे में राज्य सरकार द्वारा अपने राज्य के छात्र-छात्राओं के प्रति अहितकारी मंशा साफ प्रतीत होती है।

• नई नियमावली का प्रभाव ना सिर्फ अभ्यर्थियों बल्कि विश्वविद्यालय पर भी पड़ेगा – नीतीश सिंह

रांची विश्विद्यालय छात्र संघ के पूर्व सचिव नीतीश सिंह जी ने कहा कि उच्च शिक्षा तकनीकी विभाग का यह कदम की नैक ग्रेडिंग के आधार पर पीएचडी का अंक 30,15 तथा 5 आवंटित करना ,राज्य के शोधार्थियों तथा उच्च शिक्षा के प्रति उन्मुख विद्यार्थियों को हतोत्साहित करने वाली है। वर्तमान में बनने जा रहे स्टेच्यूट के बाद शायद ही कोई अभ्यर्थी UGC-NET/JRF तथा CSIR-NET/JRF उत्तीर्ण करने के बाद हमारे राज्य के उपर्युक्त सातों विश्वविद्यालयों से अपना पीएचडी उपाधि ग्रहण करना चाहेंगे। जिसका सीधा प्रभाव न केवल अभ्यार्थियों पर बल्कि आने वाले समय में होने वाली नैक ग्रेडिंग में इन विश्वविद्यालयों पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा।

• क्यों ना सभी विश्वविद्यालयों में शोध कार्य को बंद कर दिया जाए? – अभिषेक झा

आजसू के श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय संयोजक अभिषेक झा ने कहा कि राज्य सरकार के अंतर्गत सातों विश्वविद्यालयों में हजारों अभ्यार्थियों ने अपने उज्जवल भविष्य की कामना हेतु राज्य के विश्वविद्यालयों से यूजीसी रेगुलेशन के आधार पर नियमित रुप से फूल टाईम कोर्स करते हुए पीएचडी उपाधि ग्रहण किये जो कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बनाए जा रहे स्टेच्यूट के बाद,इन उपाधियों की मूल्य सिवाय 5अंक के अतिरिक्त कुछ नहीं रह जाएगा। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में कार्यरत घंटी आधारित अनुबंध सहायक प्राध्यापक एवं शोधार्थी पुनः छले जायेंगे।

जब उच्च शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करना चाहती है कि झारखंड से पीएचडी उपाधि प्राप्त अभ्यार्थियों को 5 अंक मिले, तो क्यों न सभी विश्वविद्यालयों में शोध कार्य(पीएचडी)को बंद कर दिया जाए ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के आतुर अभ्यार्थियों को यह दिन न देखना पड़े।

आज विभिन्न विश्वविद्यालयों में ज्ञापन सौंपने वालों में गौतम सिंह, नीरज वर्मा, नीतीश सिंह, अभिषेक शुक्ला, आशुतोष कुमार, हेमंत पाठक, अभिषेक झा , सचित रंजन , ऋतिक ,मनीष ,शमी अहमद, राहुल मिश्रा आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।

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