Saturday, April 13, 2024
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एनटीडी (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज़) के उन्मूलन के प्रति विश्व की प्रतिबद्धता को दर्शाता है एनटीडी दिवस

30 जनवरी को पूरे विश्व में मनाया जायेगा तीसरा विश्व एनटीडी दिवस

राँची , 30 जनवरी, 2022: प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को पूरे विश्व में एनटीडी दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का अभिप्राय यह है कि विश्व के सारे लोग एनटीडी (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज़) के उन्मूलन के प्रति पूरी प्रतिबद्धता से जनांदोलन के रूप में कार्य करें।

एनटीडी दिवस, वर्ष 2012 में लंदन की ऐतिहासिक घोषणा की वर्षगांठ को चिह्नित करता है, जो कि एनटीडी पर अधिक निवेश और कार्रवाई के लिए और अधिक सक्रिय रूप से कार्य करने के लिए क्षेत्रों, देशों और समुदायों की भागीदारों को एकीकृत करता है। वर्ष 2020 में विश्व को इन बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए पहली बार विश्व एनटीडी दिवस मनाया गया था।

एनटीडी जीवन को प्रभावित करने वाले रोगों का एक समूह है, जो अधिकतर गरीब, कमजोर आबादी को प्रभावित करता है। एनटीडी में हाथीपांव (लिम्फैटिक फाइलेरिया) कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस), कुष्ठरोग (लेप्रोसी), डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्प-दंश, रेबीज़ जैसे रोग शामिल होते हैं, जिनकी रोकथाम पूर्णतया संभव है; मगर फिर भी पूरी दुनिया में हर साल बहुत सारे लोग इन रोगों से प्रभावित हो जाते हैं । भारत में भी हर साल हजारों लोग इन एनटीडी रोगों से संक्रमित हो जाने के कारण जीवन भर असहनीय पीड़ा सहते हैं और दिव्यांग भी हो जाते हैं, जिसके कारण वे अपनी आजीविका कमाने में भी अक्षम भी हो जाते हैं और उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार विश्व में हर 5 में से 1 व्यक्ति इन एनटीडी रोग से ग्रसित हैं। ये गंभीर रोग हैं जो प्रभावित लोगों की शिक्षा, पोषण और आर्थिक विकास पर विपरीत प्रभाव डालते हैं, परंतु इनकी रोकथाम एवं उन्मूलन संभव है। इनके उन्मूलन के कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने से आर्थिक विकास एवं समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक रमेश घोलप ने बताया कि एनटीडी रोगों के अन्तर्गत आने वाले रोग जैसे फाइलेरिया और कालाजार के उन्मूलन के स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है और इसी क्रम में, वर्ष 2021 में 20 फाइलेरिया प्रभावित जिलों में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम सफलतापूर्वक चलाया गया, साथ ही उन्होंने यह भी बताया की अब सिर्फ दुमका जिले के दो ब्लॉक और पाकुर जिले के तीन ब्लॉक ही कालाजार एंडेमिक है और सभी फाइलेरिया एवं कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में इन रोगों के उन्मूलन हेतु सभी गतिविधियो को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है।

राज्य के वेक्टर रोग जनित कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ,एस. एन. झा ने बताया कि भारत एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देश और प्रतिबद्धता के अनुरूप राज्य में एनटीडी के उन्मूलन के लिए राज्य स्तर से ग्राम स्तर तक सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतर विभागीय समन्वय से और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओ की पहुँच दूर-दराज इलाकों तक सुनिश्चित कर राज्य को फाइलेरिया एवं कालाजार से मुक्त करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं ।

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