कोयलांचल क्षेत्र में एक बार फिर प्रतिबंधित अवैध लॉटरी का गैरकानूनी कारोबार तेज़ी से अपने पांव पसार रहा है। झारखंड सरकार द्वारा लॉटरी खेल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, झरिया विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे कोयलांचल में यह अवैध धंधा खुलेआम और बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक सख्ती और समय-समय पर पुलिस की छापेमारी के बावजूद, इस गोरखधंधे के मुख्य सरगना आज भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
झरिया बाजार, फूसबंगला बाजार, लोदना बाजार, तीसरा क्षेत्र, धनबाद स्टेशन रोड, बलियापुर क्षेत्र, जामाडोबा, डिगवाडीह बाजार, भौरा बाजार, नुनुडीह मोड़, पाथरडीह बाजार, सुदामडीह बाजार, रिवर साइड, चासनाला बाजार समेत कई अन्य इलाकों में रोज़ सुबह अवैध लॉटरी एजेंटों को छिपते-छिपाते लॉटरी बेचते देखा जा सकता है। ये एजेंट कभी चाय की दुकानों पर, तो कभी गली-मोहल्लों में घूम-घूमकर लोगों को लॉटरी खरीदने के लिए उकसाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार किसी “विटामिन एम” यानी पैसे और रसूख की ताकत के दम पर फल-फूल रहा है। यही वजह है कि कार्रवाई के बाद भी अवैध लॉटरी का नेटवर्क टूटने का नाम नहीं ले रहा।
इंडियन मीडिया काउंसिल की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, भौरा ओपी, पाथरडीह थाना, गौशाला ओपी, सिंदरी, बलियापुर थाना और सुदामडीह थाना क्षेत्र में यह गोरखधंधा ज़ोर-शोर से चल रहा है। बताया जा रहा है कि झरिया ऊपर कुली के समीर और जामाडोबा के मोहम्मद तनवीर जैसे नाम इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं, जिनके इशारे पर कई छोटे-बड़े एजेंट काम कर रहे हैं।
इस अवैध लॉटरी का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग और दिहाड़ी मजदूर बन रहे हैं। रातों-रात अमीर बनने के सपने दिखाकर, लाखों-करोड़ों रुपये के इनाम का लालच देकर उनकी गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है। गांवों, टोलों और शहरी इलाकों तक फैले इस नेटवर्क में स्थानीय लॉटरी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की लॉटरी भी धड़ल्ले से बेची जा रही है।
एजेंट खास तौर पर मजदूरों, छोटे दुकानदारों और बेरोज़गार युवाओं को निशाना बनाते हैं, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे होते हैं और किसी चमत्कार की उम्मीद में लॉटरी खरीद लेते हैं
पुलिस-प्रशासन की ओर से अवैध लॉटरी के खिलाफ कई बार छापेमारी की गई है। हालांकि, इन कार्रवाइयों में अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है। छोटे एजेंट तो कभी-कभार पकड़ में आ जाते हैं, लेकिन असली माफिया हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। स्थानीय लोग कहते हैं— “पुलिस डाल-डाल तो लॉटरी कारोबारी पात-पात।”
इस अवैध लॉटरी का असर अब सामाजिक ताने-बाने पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दिनभर की मेहनत की कमाई लॉटरी में हारने के बाद जब लोग खाली हाथ घर लौटते हैं, तो घरों में झगड़े, तनाव और पारिवारिक कलह बढ़ना स्वाभाविक है। कई परिवार आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अवैध लॉटरी का नशा अब ब्राउन शुगर की तरह नसों में घुलता जा रहा है, जिससे छुटकारा पाना बेहद मुश्किल हो गया है। एक बार इस दलदल में फंसने के बाद लोग बार-बार अपनी किस्मत आजमाने के चक्कर में और गहरे धंसते चले जाते हैं।
झारखंड में लॉटरी पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद अगर यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, तो यह पुलिस-प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि अगर समय रहते इस अवैध धंधे पर सख्ती से लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में इसके परिणाम और भयावह हो सकते हैं।
अब जरूरत है कि पुलिस-प्रशासन ठोस रणनीति के साथ इस गोरखधंधे की जड़ों पर वार करे, मुख्य सरगनाओं को चिन्हित कर गिरफ्तार करे और गरीब व मेहनतकश लोगों को इस जुए की लत से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए। तभी कोयलांचल में लोगों की खुशहाली और सामाजिक शांति बनी रह सकेगी।