The Real Khabar

दिखाएं हम,सिर्फ सच्ची ख़बरें

ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट से सच उगलवाएगी पुलिस

ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट से सच उगलवाएगी पुलिस

धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश-8 उत्तम आनंद की मौत का सच सामने लाने के लिए पुलिस ने अंतिम पासा फेंक दिया है। पुलिस ने सोमवार को जज की मौत मामले में गिरफ्तार ऑटो चालक लखन वर्मा व उसके सहयोगी राहुल वर्मा की ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट कराने की अनुमति मांगी। धनबाद थाने के इंस्पेक्टर विनय कुमार ने गिरफ्तार राहुल वर्मा व लखन वर्मा को सीजेएम अर्जुन साव की अदालत के समक्ष पेश किया। दोनों की रजामंदी लेकर न्यायालय ने ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट की मंजूरी दे दी।

पुलिस ने लखन और राहुल की रिमांड अवधि में 10 दिन का विस्तार करने की प्रार्थना करते हुए कोर्ट को बताया कि गुजरात के गांधी नगर स्थित डायरेक्टोरेट ऑफ फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएफ) में ब्रेन मैपिंग की अनुमति दी जाए। सीजेएम ने दोनों आरोपियों से बारी-बारी से उनका पक्ष जाना। दोनों को ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट के बारे में जानकारी दी गई। आरोपियों कोर्ट के समक्ष दोनों टेस्ट कराने की सहमति दी।

अदालत ने पुलिस से सवाल किया कि क्या वह टेस्ट की तिथि एफएसएल से प्राप्त कर चुकी है? पुलिस की ओर बताया गया नहीं। इसके बाद न्यायालय ने पुलिस को आदेश दिया गया कि पहले एफएसएफ से तिथि तय करा कर कोर्ट आएं। तिथि फाइनल होने के बाद दोनों को पुलिस फिर से रिमांड पर लेगी। बता दें कि पुलिस 29 जुलाई की देर रात पांच दिन की पूछताछ के लिए दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर ले गई थी। इसके बाद रिमांड अवधि बढ़़ाने की अर्जी वापस लेते हुए दोनों को जेल भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों का ब्रेन मैपिंग के साथ-साथ नार्को टेस्ट भी कराया जाएगा। न्यायालय से अनुमति मांगी गई है। जल्द ही तिथि तय कर टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संजीव कुमार, एसएसपी, धनबाद

ब्रेन मैपिंग टेस्ट: आरोपी के मस्तिष्क में क्या चल रहा है इसे बाहर लाने के लिए ब्रेन मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए संदेही के सिर पर हेड कैप लगाया जाता है। संदेही को कंप्यूटर स्क्रीन पर क्राइम से जुड़े वीडियो, फोटो, ऑडियो दिखाए और सुनाए जाते हैं। इसमें संदेही को कोई दवा नहीं दी जाती। सिर्फ मैपिंग टेस्ट लैब में उन्हें एक कुर्सी पर बैठाया जाता है। सिर पर उपकरण के जरिए सच और झूठ का पता लगाया जाता है। एक अन्य मशीन पर प्रदर्शित तरंगों के माध्यम से संदेही के गतिविधियों का अध्ययन कर सच और झूठ का पता लगाया जाता है। जांच में सात से आठ दिन में रिपोर्ट सामने आती है।

नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट
नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट को संदेही ट्रूथ ड्रग नाम की एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है। सोडियम पेंटोथल या सोडियम अमाइटल का इंजेक्शन लगाते ही संदेही अर्द्धबेहोशी की अवस्था में पहुंच जाता है। उसके तार्किक समझ की शक्ति को कमजोर कर दिया जाता है। उसी अवस्था में उससे पुलिस केस से संबंधित तैयार प्रश्न पूछते हैं। माना जाता है कि इस अवस्था में संदेही जो बोलेगा सच बोलेगा। झूठ बोलने के लिए संदेही को दिमाग का इस्तेमाल करना होगा, लेकिन दवाओं के असर के कारण वह ऐसा नहीं कर पाएगा। वह घुमा-फिरा जवाब भी नहीं दे पाएगा।

THE REAL KHABAR