रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के “नन्हे फरिश्ते” अभियान ने एक बार फिर मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। गुरुवार को रांची रेलवे स्टेशन पर संयुक्त अभियान के दौरान दो नाबालिग लड़कियां अकेली और संदिग्ध अवस्था में मिलीं , जिन्हें समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। यह कार्रवाई आरपीएफ पोस्ट रांची की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) , डीएनएफटी रांची और सीआईबी रांची की संयुक्त टीम द्वारा की गई।स्टेशन परिसर में संदिग्ध अवस्था में मिलीं बच्चियां
संयुक्त टीम द्वारा स्टेशन परिसर में नियमित निगरानी और जांच के दौरान दो नाबालिग लड़कियां अकेली, घबराई हुई और असहज स्थिति में नजर आईं। टीम को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत रोककर पूछताछ की गई। जांच के दौरान लड़कियों ने अपना नाम—आरिति कंडुलना (उम्र 14 वर्ष)चुनु कंडुलना (उम्र 16 वर्ष) बताया। दोनों खटंगा गांव, जिला खूंटी की निवासी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में लड़कियों ने बताया कि वे घरेलू काम की तलाश में घर से निकल पड़ी थीं और इसी क्रम में रांची
लड़कियों के नाबालिग होने की पुष्टि होते ही आरपीएफ टीम ने मानव तस्करी की संभावित आशंका को देखते हुए तुरंत सतर्कता बरती। “नन्हे फरिश्ते” अभियान के दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं
लड़कियों की सुरक्षा और काउंसलिंग का ध्यान रखा गया
पूरे मामले की विधिवत दस्तावेज़ीकरण किया गया
इसके बाद दोनों नाबालिग लड़कियों को चाइल्डलाइन रांची के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि उन्हें सुरक्षित आश्रय, परामर्श और आगे की सहायता मिल सके।
RPF का “नन्हे फरिश्ते” अभियान रेलवे परिसरों में भटके हुए, गुमशुदा और जोखिम में पड़े बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित जीवन की ओर लौटाने** का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस अभियान के तहत अब तक कई बच्चों को मानव तस्करी, बाल मजदूरी और शोषण से बचाया जा चुका है।
इस सराहनीय कार्रवाई में आरपीएफ के कई अधिकारियों और जवानों का अहम योगदान रहा। विशेष रूप से—
उपनिरीक्षक सोहन लाल स्टाफ संजय यादव दिव्या सिंह पी. पान एस. पी. टोप्पो सी. कच्छप की सतर्कता, मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित कार्रवाई ने दो मासूम जिंदगियों को सुरक्षित भविष्य की ओर मोड़ दिया।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गरीबी और रोजगार की तलाश में घर से निकलने वाले नाबालिग बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे में RPF और अन्य एजेंसियों की सतर्कता समाज के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रही है।
फिलहाल दोनों बच्चियां चाइल्डलाइन की देखरेख में सुरक्षित हैं, और आगे की प्रक्रिया के तहत उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें घर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
RPF का यह मानवीय प्रयास न सिर्फ कानून का पालन है, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी भी है—जिसने दो नन्ही जिंदगियों को अंधेरे से उजाले की ओर पहुंचा दिया।