Saturday, April 13, 2024
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हेमंत सरकार की गलतियों की सजा भुगत रहें छठी जेपीएससी के अभ्यर्थी : गौतम सिंह

• सफल एवं असफल अभ्यर्थियों की भावनाओं के साथ सरकार ने किया खिलवाड़
• तानाशाह सरकार ने ना उच्च न्यायालय के निर्णय पर अमल किया और ना ही आंदोलनरत युवाओं की आवाज़ को सुना

राँची। जब छठीं जेपीएससी परीक्षा में गलत ढंग से चयनित 326 अधिकारियों को हाईकोर्ट ने सात जून को अवैध घोषित करते हुए जेपीएससी के दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने की आदेश दिया था तो हेमंत सरकार में उन अवैध अधिकारियों को पद मुक्त क्यों नहीं किया और न ही दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की। इससे यह साफ साबित होता है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं। हेमंत सरकार ने ना सिर्फ असफल अभ्यर्थियों की आकांक्षाओं के साथ खिलवाड़ किया है बल्कि सफल अभ्यर्थियों की भावनाओं के साथ कुठाराघात किया।

छठी जेपीएससी के कई अभ्यर्थी जो आज बीडीओ और पदाधिकारी के रुप में कार्यरत हैं, उन्हें हाईकोर्ट के डबल बेंच द्वारा दिये गए निर्णय के बाद गहरा आघात एवं चोट पहुँचा है और इसके लिए पूरी तरह से हेमंत सरकार जिम्मेदार है। आनन-फानन में छठी जेपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित करने के बाद इन्होंने ना उच्च न्यायालय के निर्णय पर अमल किया और ना ही आंदोलनरत युवाओं की आवाज़ को सुना।

इसमें कोई दो मत नहीं कि जबसे झामुमो महागठबंधन की सरकार सत्ता में आयी है तबसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पिछले दो सालों में जेपीएससी ने कई ऐसे वक्तव्य दिए तथा कई विवादास्पद निर्णय लिए, जिसने जेपीएससी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

आदरणीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को जेपीएससी छह के सभी अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके माता-पिता एवं परिवार और समस्त झारखण्डी जनता से माफी मांगनी चाहिए, उनके एक निर्णय ने कई परिवारों के अरमानों को खाक कर दिया तथा कितने अभ्यर्थियों का बहुमूल्य समय बर्बाद कर दिया।

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