रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के करीबी सहयोगी एवं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश सेंगर ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात बाल अधिकारों, बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रही।
भेंट के दौरान राकेश सेंगर ने मुख्यमंत्री को कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा, उनकी नवीन पुस्तक “करुणा: द पावर ऑफ कंपैशन” तथा बाल ग्राम का वर्ष 2025–26 का वार्षिक प्रतिवेदन सप्रेम भेंट किया। इन पुस्तकों और दस्तावेजों के माध्यम से उन्होंने बच्चों के अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।
इस अवसर पर राकेश सेंगर ने कैलाश सत्यार्थी की संस्था ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ द्वारा झारखंड में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्था राज्य में बाल मजदूरी के उन्मूलन, बाल तस्करी की रोकथाम, शिक्षा के प्रसार तथा बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही है। साथ ही बाल अधिकारों के संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की भी जानकारी दी गई।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दूरभाष के माध्यम से स्वयं कैलाश सत्यार्थी से भी संवाद किया। इस बातचीत में बच्चों के अधिकारों, उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे कार्यों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बाल कल्याण के क्षेत्र में कैलाश सत्यार्थी और उनकी संस्था के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार राज्य में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल श्रम के खिलाफ अभियान और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इन प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाएगी, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।