झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जमीन घोटाले की जांच से जुड़े MP/MLA केस संख्या 2/2024 को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन की कथित अनदेखी से संबंधित है, जिसे लेकर निचली अदालत ने पहले ही संज्ञान ले लिया था।
दरअसल, जमीन घोटाले की जांच के क्रम में ED ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए समन जारी किया था। ED का आरोप था कि सीएम ने इन समनों की अनदेखी की, जिसके बाद एजेंसी ने MP/MLA मामलों की विशेष अदालत में याचिका दाखिल की। इस पर निचली अदालत ने संज्ञान लेते हुए न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
निचली अदालत की इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका में मांग की थी कि निचली अदालत द्वारा शुरू की गई पूरी कार्यवाही को रद्द किया जाए। इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले मुख्यमंत्री को बड़ी राहत देते हुए निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट भी प्रदान की थी।
सोमवार को इस अहम मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना और उपलब्ध तथ्यों व कानूनी पहलुओं पर विचार किया। सभी तर्कों पर मंथन के बाद अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब MP/MLA विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही जारी रहेगी। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ झामुमो के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे कानून की जीत बताते हुए हमला तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर झारखंड की राजनीति और गरमाने के आसार हैं।